यूएई एक्सपो 2020 के जरिये विश्व को अपनी आर्थिक मज़बूती दिखाएगा
और हमें समृद्ध, सुशिक्षित, स्वस्थ भारत नहीं, बल्कि हिंदू राष्ट्र की जरूरत है !
एक्सपो 2020 दुबई को एक समृद्ध व सुंदर वैश्विक पर्यटन केंद्र बना देगा, चित्र सौजन्य―खलीज टाइम्स
आज 1 अक्टूबर को दुबई में वैश्विक मेला EXPO 2020 का भव्य उद्धाटन समारोह हो रहा है, जो अगले साल मार्च तक चलेगा। इसमें दुनिया के 90 देश भाग ले रहे हैं। तकरीबन 2.9 वर्ग किलोमीटर में आयोजित हो रहे इस भव्य वैश्विक मेले को देखने 190 देशों से 2.5 करोड़ लोग आयेंगे। जिसमें 70% पर्यटक होंगे।
इस तरह के एक्सपो की शुरुआत 1851 में लंदन में आयोजित इंडस्ट्रियल मेले से हुई थी। यह अब तक 14 देशों में आयोजित किया गया है। अमेरिका में यह दो बार आयोजित हुआ। जिसमें स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी (1886) और डिजनीलैंड (1955) विशेष रूप से बनाये गये। फ्रांस का एफिल टॉवर (1889) भी ऐसे ही मेले की देन है।
आज 170 साल बाद मध्य पूर्व, अफ्रीका और दक्षिण एशिया में पहली बार यह मेला करीब नब्बे लाख आबादी वाले मुल्क यूएई के दूसरे सबसे बड़े शहर दुबई में आयोजित किया जा रहा है। इस भव्य मेले के बाद 20% इमारतों और पैवेलियन को तोड़ दिया जायेगा और बाकी दुबई को इसकी बदौलत एक चमकीली निशानी सैकड़ों साल तक मिलती रहेगी।
ईवाई की रिपोर्ट के अनुसार यूएई की अर्थव्यवस्था पर एक्सपो 2020 का गहरा प्रभाव पर पड़ेगा। एक्सपो 2020 व इसकी विरासत से यूएई की अर्थव्यवस्था में 2013 से 2031 तक 122.6 बिलियन डॉलर का याेगदान मिलने की उम्मीद है।
चित्र सौजन्य―खलीज टाइम्स
रिपोर्ट में कहा गया है कि एक्सपो 2020 यूएई में वर्ष 2013 से 2031 तक 9,05,200 पूर्णकालिक नौकरियां देगा जाे इस अवधि के दाैरान यूएई में लगभग 49,700 प्रतिवर्ष नौकरियों के बराबर है। रिपोर्ट पर टिप्पणी करते हुए दुबई एक्सपो 2020 ब्यूरो के कार्यकारी निदेशक नजीब मोहम्मद अल-अली ने कहा कि यह स्वतंत्र रिपोर्ट एक्सपो 2020 यूएई के भविष्य में महत्वपूर्ण दीर्घकालिक निवेश काे दर्शाती है।
एक रिपोर्ट के अनुसार इस मेले का आयोजन दुबई को 2021-22 तक 1.5% GDP देगा। सिर्फ होटल और रेस्तराँ ही 3 बिलियन डॉलर का धंधा करेंगे।
एक्सपो 2020 याेजना यूएई की भविष्य की दिशा में स्थायी आर्थिक विकास, नवाचार-संचालित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ने, परिवहन, पर्यटन, आधारभूत निर्माण, रियल एस्टेट और शिक्षा जैसे प्रमुख विकास मानकों को ध्यान मे रखकर बनाई गई है।
चित्र सौजन्य―गल्फ न्यूज
दुबई की विकास-यात्रा―
दुबई का विकास तेल की खोज होने पर 1960 के बाद प्रारंभ हुआ। उसके पहले यहां कुछ भी नहीं था लेकिन मात्र 50 वर्षों में इसने इतनी उन्नति कर ली कि आज यह विश्व के शानदार शहरों में गिना जाता है। इसके बावजूद दुबई की अर्थव्यवस्था में तेल का योगदान मात्र 6% है। यहां के राजस्व का सबसे बड़ा स्रोत टूरिज्म, बिज़नैस और रियल एस्टेट है। दुबई की आबादी लगभग 28 लाख है, जिसमें से 43.4 % लोग भारतीय मूल के हैं।
आपको याद होगा कि वर्ष 1992 तक दक्षिण एशिया का दुबई मुंबई या सिंगापुर थे। इसके बाद वैश्विक स्तर पर पैट्रो डॉलर का प्रभुत्व बढ़ने से अन्य अरब देशों की तरह संयुक्त अरब अमीरात में भी समृद्धि आई। इसी दौर में संयुक्त अरब अमीरात के उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने 2007 में संयुक्त अरब अमीरात संघीय सरकार की रणनीति में अनेक सुधार किये।
उन्होंने 2010 में यूएई को दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में से एक बनाने के उद्देश्य से संयुक्त अरब अमीरात विजन 2021 लॉन्च किया था। इसी क्रम में उन्होंने दुबई को एक वैश्विक शहर के रूप में विकासित करने का बीड़ा उठाया। दुबई में अंतर्राष्ट्रीय वित्त केंद्र, दुनिया की सबसे ऊंची इमारत बुर्ज खलीफ़ा, पाम आइलैंड्स, टेक्नोलॉजी पार्क, मुक्त आर्थिक क्षेत्र और बुर्ज-अल-अरब होटल जैसी कई परियोजनाओं का निर्माण किया।
इन सात सालों में हमने क्या किया? देश निर्माण की दिशा में शहरों के नाम बदले, मंदिर व मूर्तियां बनाईं। हम लोगों ने दंगा-एक्सपो करने की जो शुरुआत 1935 में की थी उसका विस्तार टाटा के जमशेदपुर (1964 व 1979), 1993 में मुंबई, मुरादाबाद, मेरठ, बनारस, होते हुए सूरत और अहमदाबाद (2001-2) और दिल्ली (2020) तक किया।
दुनिया 'इंडस्ट्रियल एक्सपो' कर रही है और हम लोग योजनाबद्ध होकर 'दंगा-एक्सपो' करके विश्वगुरु बन रहे हैं। बातें करते हैं बनारस को क्योटो बनाने की। जबकि काशी-विश्वनाथ, मथुरा, आगरा के ताजमहल को लेकर नये 'दंगा-एक्सपो' करने के मंसूबे बांध रहे हैं क्योंकि हमें समृद्ध, सुशिक्षित, स्वस्थ भारत नहीं बल्कि हिदू राष्ट्र की जरूरत है !



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