बुधवार, 20 अक्टूबर 2021

मुझे शर्म नहीं आ रही, तुम जो कर रहे हो वह शर्मनाक है !

 मुझे शर्म नहीं आ रही, तुम जो कर रहे हो वह शर्मनाक है !

(फोटो―अंटोनियो गर्तिया कोनेहो, साभार―सोशल मीडिया)

मैक्सिको की संसद के निचले सदन केमारा दे दिपुतादोस में अपने कपड़े उतारते और अंडरपैन्ट्स पहने पोडियम के पीछे खड़े होकर भाषण देते ये सज्जन मैक्सिको की डेमोक्रेटिक रेवोल्यूशन पार्टी के संसद सदस्य अंटोनियो गर्तिया कोनेहो (Antonio Garcia Conejo) हैं। सन् 2013 में बीबीसी, द वाल स्ट्रीट जर्नल और डेली मेल द्वारा प्रकाशित ये तस्वीरें पूरी दुनिया में वायरल हैं।

इन अखबारों की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंटोनियो गर्तिया कोनेहो संसद में अपने कपड़े उतार कर नए एनर्जी बिल का विरोध कर रहे थे जिसके तहत एक-दूसरे से प्रॉफ़िट शेयर करने के लिए प्राइवेट कंपनियों को सरकारी कंपनी पेमेक्स (Pemex) के साथ तेल और गैस के खनन की मंज़ूरी दी गयी थी।

द गार्डियन ने अगस्त में रिपोर्ट किया था कि मैक्सिको की सरकारी तेल कंपनी पेमेक्स के पूर्व मुखिया एमिलिओ लोजोया ने वहां के पूर्व राष्ट्रपति एनरीक पेना नियेतो, फे़लिप काल्देरों और कार्लोस सेलिनास पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

(फोटो―अंटोनियो गर्तिया कोनेहो, साभार―सोशल मीडिया)

अंटोनियो गर्तिया का यह ऐतिहासिक भाषण केमारा दे दिपुतादोस (Cámara de Diputados) ने अपनी वेबसाइट पर अपलोड किया था। दरअसल वे सरकार के एनर्जी बिल का विरोध कर रहे थे जिसने प्राइवेट कंपनियों को सरकारी तेल कम्पनी के साथ निवेश की मंज़ूरी दी थी।

गर्तिया कपड़े उतारना शुरू करते हैं और कहते हैं, “क्योंकि वे (सरकार) ऐसा कर रहे हैं, इसलिए मुझे शर्म नहीं आ रही है। सरकार ने मैक्सिको के टेलिकॉम को छीन कर निजी हाथों में दे दिया। मुनाफ़ा कहां गया? मैक्सिको का रेल-रोड भी कोई मुनाफा नहीं देने वाले। शर्म आनी चाहिए तुम्हें…! तुम इसे जो चाहे कहो। तुम कायर हो, तुम एक कायर हो, तुम एक कायर हो। तुम लोग डरपोक हो क्योंकि जब वे तुम्हारे कपड़े उतार रहे थे तब तुमने कुछ नहीं किया।”

(फोटो―अंटोनियो गर्तिया कोनेहो, साभार―सोशल मीडिया)

बीबीसी ने अपनी रिपोर्ट में उनका बयान दिया था, “ऐसे ही तुम देश को भी नंगा कर रहे हो। मुनाफ़ा कहां है? मुझे शर्म नहीं आ रही, तुम जो कर रहे हो वह शर्मनाक है।”

मैक्सिको में 2013 के दौरान जो कुछ भी हो रहा था, भारत में पिछले सात सालों में उससे भी कहीं अधिक भयावह स्थिति बना दी गई है और वह क्रम अभी भी निर्बाध रूप से जारी है। बड़ी तेजी से अरबों-खरबों रुपए के सरकारी उपक्रम और सम्पत्तियां अपने मित्रों को औने-पौने दामों पर सौंपी जा रही हैं जिसके बदले में पीएमकेअर फंड और इलैक्टोरल बॉन्ड्स जैसे चोर रास्तों से रिश्वत लेकर अकूत धन इकट्ठा किया जा रहा है। तरह-तरह के उपायों से जनता की जेब खाली कर उसकी बचत और क्रयशक्ति को खत्म किया जा रहा है। आलोचकों, विरोधियों और आंदोलनकारियों को बदनाम करने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्र रचे जा रहे हैं। उन्हें झूठे मुक़दमे दर्ज कर जेलों में ठूंस दिया जा रहा है। पूंजीपतियों द्वारा संचालित मीडिया के माध्यम से देश को गुमराह किया जा रहा है। यानी तानाशाही पूरे चरम पर है।

ऐसे में किसी राजनेता और मीडिया आउटलेट्स से इस तरह सत्ताधारी पार्टी की बखिया उधेड़ने की कल्पना भी नहीं की जा सकती है।

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