रविवार, 28 नवंबर 2021

 भारत को पाब्लो एस्कोबार का कोलंबिया बनाया जा रहा है

➤मुंबई में पकड़ी गई 1000 करोड़ रुपये की ड्रग्स, अफगानिस्तान से लाई गई थी हेरोइन (10 अगस्त, 2020)

➤DRI ने पकड़ी 2000 करोड़ की हेरोइन, ईरान से लाए थे मुंबई (5 जुलाई, 2021)

➤ड्रग्स की बड़ी खेप के साथ 7 अरेस्ट, गुजरात तट पर पकड़ी गई ईरानी नौका (19 सित. 2021)

➤ADANI के स्वामित्व वाले मुंद्रा पोर्ट पर पकड़ी गई ड्रग्स की सबसे बड़ी खेप, मोदी-शाह सहित मीडिया की चुप्पी पर बड़े सवाल (20 सित. 2021)

➤गुजरातः 20000 करोड़ तक हो सकती है मुंद्रा पोर्ट से जब्त की गई ड्रग्स की कीमत, तालिबान-ISI पर भी शक (21 सितंबर 2021)

➤डीआरआई ने मुंबई से पकड़ी 125 करोड़ रुपये की हेरोइन, मूंगफली की बोरियों के कंटेनर में रखा गया था मादक पदार्थ (8 अक्टूबर, 2021)

➤Drug Seize: गुजरात में 350 करोड़ रुपये का नशीला पदार्थ जब्त, दो गिरफ्तार (10 नवबर, 2021)

यदि केवल पिछले पांच महीनों में आई इस तरह की खबरों को मिलाकर देखें तो भावी भारत की जो तस्वीर उभरती है उसमें और पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया के जमाने के कोलंबिया में ज्यादा फर्क महसूस नहीं होता, बशर्ते कि आप दुनिया के उस सबसे बड़े धनवान और क्रूरतम ड्रग माफिया के बारे में जानते हों।

    

                                                    

(फोटो―पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया, सौजन्य―Mathrubhumi/शोसल मीडिया)

 

कोलंबिया के रियोनेग्रो में 1 दिसंबर 1949 को जन्मा पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया अब तक इतिहास का सबसे कामयाब और धनाढ्य ड्रग माफिया है। उसने कोकीन की तस्करी से इतना अधिक पैसा बनाया था कि साल 1989 में फ़ोर्ब्स पत्रिका ने उसे 25 बिलियन अमेरिकी डॉलर की संपत्ति के साथ दुनिया का सातवां सबसे अमीर व्यक्ति घोषित किया था।  

कोलंबिया में मेडेलिन के पास एक छोटे से शहर में एक स्कूल शिक्षक मां और किसान बाप के छह बच्चों में से एक पाब्लो और उसके भाई को पास में जूते न होने के कारण स्कूल से लौटा दिया गया था। उसे पैसे के अभाव में यूनिवर्सिदाद डी एन्तियोकिया से राजनीति विज्ञान में ग्रेजुएशन के दौरान अपनी पढ़ाई अधूरी छोड़नी पड़ी थी। 

अपने जीवन की शुरुआत में वह कब्रों से पत्थर व तरह-तरह की अन्य चीजें चुराकर तस्करों को बेचता था। इसके बाद 20 वर्ष की उम्र आते-आते पाब्लो ने प्रतिबंधित सिगरेट व नकली लॉटरी टिकट बेचने, कार चुराने के अलावा कई तरह के गैरकानूनी कामों की शुरुआत की। फिर उसने जल्द से जल्द अमीर बनने के लिए नशीली दवाओं के कारोबारी अलवारो प्रेटो के साथ काम किया और मात्र 2 साल में करोड़पति बन गया।  

इसके बाद एस्कोबार ने प्रेटो से अलग होकर जल्दी ही ड्रग माफिया के मेडेलिन कार्टेल को संगठित कर कोलंबियाई सीमाओं के पार समुद्री तथा वायु मार्ग से पेरू, इक्वाडोर और बोलीविया सहित अमेरिकी और यूरोपीय महाद्वीप के विभिन्न देशों में कोकीन के धंधे को बढ़ावा दिया। एक समय दुनिया भर में फैले कोकीन के कारोबार में से 85 फीसदी पर अकेले पाब्लो का कब्ज़ा था। 

वह सरकार की ड्रग्स सम्बंधी नीतियों तथा योजनाओं की टोह लेता रहता था। वह अपने कारोबार के विस्तार के लिए नियमित रूप से अधिकारियों, न्यायाधीशों, पुलिस और पत्रकारों को लाखों डॉलर के तोहफे तथा नकदी बतौर नजराना देता था। 

(फोटो―पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया, सौजन्य―शोसल मीडिया) 


पाब्लो अपनी काली कमाई से स्कूलों व गिरजाघरों के निर्माण के अलावा गरीबों को पैसा बांटता था। मेडेलिन की गरीब जनता उसकी पहरेदारी करती थी और युवा उसके विश्वासपात्र मुखबिर हुआ करते थे। 

पाब्लो एस्कोबार के एकाउंटेंट रॉबर्टो के अनुसार पाब्लो को नोटों की गड्डियां बांधने के लिए हर हफ्ते एक हजार डॉलर के रबर बैंड खरीदने पड़ते थे। चूंकि वह अपनी काली कमाई को बैंकों में नहीं रख सकता था, इसलिए इसे गोदामों और गड्ढों में रखा जाता था। इस कारण इस नकदी का 10 फीसदी (करीब 1 मिलियन डॉलर प्रतिवर्ष) चूहे नष्ट कर देते थे। 

उसके पास असंख्य लग्जरी गाड़ियां, आलीशान घर और दफ्तर हुआ करते थे। उसने 1975 में अमेरिका में कोकीन की खेप पहुंचाने के लिए अपना खुद का विमान उड़ाया और बाद में इस विमान को अपने फार्म हाउस के आंगन में टांग दिया। अपने चरमोत्कर्ष के दौरान पाब्लो का मेडेलिन ड्रग कार्टेल एक दिन में प्राय: 15 टन कोकीन की तस्करी करता था, जिसकी उन दिनों अमेरिका में आधा बिलियन डॉलर से ज्यादा कीमत थी।

ड्रग तस्कर पाब्लो एस्कोबार कोलंबिया में अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी व्यक्ति था और कोलंबिया की राजनीति के शीर्ष पर पहुंचने का सपना देखने लगा था। उसने महसूस किया कि उसके पास राजनीतिक शक्ति नहीं है तो पैसा तो पर्याप्त है। इसलिए उसने अपने राजनीतिक मंसूबे पूरा करने के लिए अपनी अकूत दौलत के बल पर साल 1986 में कोलंबिया का 10 बिलियन डॉलर का विदेशी कर्ज चुकता कर देने का प्रस्ताव सरकार के सामने रखा। धन और चालबाजियों के बल पर वह गणतंत्र की कांग्रेस तक पहुंच गया। जहां जाकर उसका देश की केंद्रीय सत्ता पर सीधी पकड़ होना निश्चित थी। 

इससे पाब्लो को रोकने के लिए पूरे कोलंबिया में उसकी मुखालिफत करने वाले अकेले अखबार 'एल एस्पक्टाडोर' के संपादक गिलेरमो कानो ने अभियान छेड़ दिया। बौखलाये पाब्लो ने उसके दफ्तर को बम से उड़ाने के अलावा गिलेरमो को मरवा दिया। पाब्लो ने अपना वर्चस्व बनाये रखने के लिए कई मंत्रियों, राजनेताओं, न्यायाधीशों, अधिकारियों, पुलिसकर्मियों, पत्रकारों और तस्करों की हत्याएं करवाईं। यहां तक कि उसने चार राष्ट्रपतियों का जीवन दुःस्वप्न बना दिया, अधिकारियों में घुसपैठ की और पूरी दुनिया को चुनौती दी। उसके साथ हुई खूनी जंग में सिर्फ साल 1991 में ही 700 से ज्यादा लोग मारे गए थे।

दुस्साहसी पाब्लो ने ड्रग्स तस्करी के साथ-साथ अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति में बाधक बने राष्ट्रपति पद के एक उम्मीदवार लुइस कार्लोस गैलान की चुनाव सभा में बम विस्फोट से हत्या करवा दी और कोलंबिया का राष्ट्रपति बनने के सपने देखने लगा। इन हत्याओं के बाद कोलंबिया का शासन-प्रशासन एस्कोबार के पूरी तरह खिलाफ हो गया।

पाब्लो एस्कोबार को सरकार ने सुधरने का एक मौका दिया। उसने खुद को अमेरिका प्रत्यारोपित किये जाने से बचने के लिए जेल जाना स्वीकार किया तो वह राजाओं के महल जैसी सुख-सुविधाओं से लैस अपनी ही निजी जेल ‘ला कैटेड्रल’ में खुद को कैद करने को राजी हो गया परंतु वहां से भी वह अपनी गतिविधियां निर्बाध रूप से जारी रखे हुए था। जब उसके खिलाफ कार्रवाई की गई तो जेल से भाग कर राज्य, शासक वर्ग और पूरे देश के विरुद्ध युद्ध की घोषणा कर दी। उसे हराने के लिए सरकार ने एक शक्तिसम्पन्न आधुनिक संसाधनों से लैस समूह का गठन किया। रेडियो ट्राएंगुलेशन तकनीक के इस्तेमाल से कोलंबियाई पुलिस ने उसकी लोकेशन पता लगाया था और घेराबंदी कर दी। 

इसी दौरान मेडेलिन के एक घर में छिपे पाब्लो और उसके अंगरक्षक को 2 दिसंबर, 1993 को पुलिस के साथ हुई फायरिंग मे गोली मार कर खत्म कर दिया। 

(फोटो―रॉबर्टो एस्कोबार, सौजन्य―Gina Dimuro)


अपनी मृत्यु के समय पाब्लो अपनी पत्नी मारिया विक्टोरिया और बच्चों जुआन पाब्लो और मैनुएला के लिए एक ग्रीक किले का निर्माण करवा रहा था। तमाम तरह के चढ़ाव-उतारों से भरे पाब्लो एमिलियो एस्कोबार गैविरिया के सफर का विस्तृत विवरण उसके भाई रॉबर्टो एस्कोबार की किताब 'द एकाउंटेंट्स स्टोरी' में मिलता है।


अब एक ही खेप में जिस गति से और जितनी बड़ी मात्रा में अरबों-खरबों रुपये मूल्य की ईरान, अफगानिस्तान के रास्ते देश में लाई गई नशीली दवाओं की खेप आये दिन पकड़ी जा रही हैं उससे यह अनुमान सहज ही लगाया जा सकता है कि ऐजेंसियों की पकड़ से छूट/बच जाने वाली ड्रग्स कितनी हो सकती है। जिसे देश के विभिन्न हिस्सों में पहुंचा कर देश को भयानक हानि पहुंचाई जा रही है। 

दूसरी ओर सरकार नारको एक्ट में बदलाव कर ड्रग्स को कम मात्रा में निजी उपयोग के लिए रखना अपराध के दायरे से बाहर करने जा रही है। इसके लिए संसद के अगले सत्र में विधेयक लाने की तैयारी है। क्या सरकार यह नहीं समझ सकती है कि ऐसा करने से तो देश में अधिक से अधिक लोग बेखटके ड्रग्स का इस्तेमाल करना शुरू कर देंगे और ड्रग्स की खपत में वृद्धि होने से इसका कारोबार खूब तरक्की करेगा?  

इससे भी दुखदाई यह है कि देश में न तो कोई गिलेरमो कानो जैसा पत्रकार दिखाई देता है और न ही लुइस कार्लोस गैलान जैसा ईमानदार, निर्भीक और देश के प्रति प्रतिबद्ध राजनेता। इससे देश के जल्दी ही पाब्लो एस्कोबार का कोलंबिया जैसा बन जाने की पूरी सम्भावना है।

मंगलवार, 9 नवंबर 2021

अमरत्व की ओर बढ़ते विज्ञान के कदम

 अमरत्व की ओर बढ़ते विज्ञान के कदम

हाल ही में दो जेनेटिक इंजीनियरों ने अपनी नई पुस्तक 'द डेथ ऑफ डेथ' के प्रेजेंटेशन के दौरान दावा किया कि 25 साल बाद मनुष्य के लिए मरना स्वैच्छिक और उम्र बढ़ने से रोकना चिकित्सा योग्य हो जाएगा। इनका कहना है कि अमर रहना एक वास्तविक और वैज्ञानिक संभावना है, जो मूल रूप से सोचे जाने की तुलना में बहुत पहले आ सकती है। 

(फोटो साभार―सोशल मीडिया)

वेनेजुएला में जन्मे जोस लुई कोरडैरो और कैंब्रिज के गणितज्ञ डेविड वुड का कहना है कि 2045 के आस-पास इंसानों की मौत केवल हादसों से होगी न कि किसी प्राकृतिक कारण या बीमारी से। 

इनका कहना है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि बुढ़ापे को किसी बीमारी के तौर पर वर्गीकृत किया जाता है। नई आनुवंशिक परिवर्तन तकनीकों में प्रमुख नैनो टेक्नोलॉजी से इस प्रक्रिया में खराब जीन को स्वस्थ जीन में बदला जाएगा, शरीर से मृत कोशिकाओं को खत्म करना, नष्ट हो गई कोशिकाओं को ठीक करना, स्टेम सेल से इलाज और महत्वपूर्ण अंगों को 3डी में प्रिंट करना शामिल है। 

अमेरिका के मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी में पदस्थ कोरडैरो का कहना है, 'उसने न मरने का फैसला किया है और 30 साल बाद वह आज के मुकाबले ज्यादा युवा होगा।'

बुढ़ापा यानी कि एजिंग, डीएनए के सिरे पर मौजूद टेलोमर्स (Telomeres) का परिणाम है, जो क्रोमोसोम्स में होते हैं। बढ़ती उम्र के साथ ये छोटे, कमजोर और क्षतिग्रस्त होने लगते हैं, इसे रोकने के लिए टेलोमर्स को लंबा करना होता है।

इन दोनों इंजीनियरों के अनुसार वे गैरकानूनी तरीके से दो साल पहले से इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और इनकी पहली मरीज एलिजाबेथ पैरिस हैं, जिन्होंने उम्र बढ़ने के लक्षणों को रोकने का इलाज करने में रुचि दिखाई।

वुड ने बताया कि उनका इलाज काफी जोखिम भरा और गैरकानूनी था, लेकिन अभी उस इलाज का कोई साइड इफेक्ट नहीं दिखाई दिया है और उनके खून में टेलोमर्स का स्तर पहले की तुलना में आज भी 20 साल पूर्व की स्थिति में है।

लेकिन अमरत्व की ओर बढ़ते विज्ञान के इस कदम से मरण की प्राकृतिक प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न होगी जिससे अनेक प्रकार के सामाजिक, आर्थिक व अन्य प्रकार के संकट पैदा हो जायेंगे क्योंकि पुराने मरेंगे नहीं और नये जन्म लेते जायेंगे तो लगातार बढ़ती जनसंख्या का बोझ धरती के संसाधनों पर पड़े बिना नहीं रहेगा। प्राकृतिक संसाधन समाप्त हो जायेंगे। सरकारों द्वारा की जाने वाली भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, परिवहन आदि सम्बंधी व्यवस्थाएं कम पड़ती जायेंगी। हिंसा और शोषण की प्रवृत्ति में भयानक वृद्धि होगी। 

ऐसे में इस वैज्ञानिक खोज का लाभ उठाने वाला कोई भी व्यक्ति धरती पर मौजूद रहेगा भी कि नहीं? इस प्रश्न का उत्तर आज ही ढूँढना होगा। खुद समस्या खड़ी कर समाधान भावी पीढ़ी पर छोड़ देना बुद्धिमानी नहीं, बल्कि मूर्खता होगी। वैसे मूर्खता के इस स्वर्णकाल में शायद यह सवाल उठाना भी अपने आप में मूर्खता ही कही जायेगी। 

मनुष्य की यात्रा और वर्तमान पड़ाव

मनुष्य की यात्रा और वर्तमान पड़ाव  वैज्ञानिकों द्वारा किये गये जीनोम-अध्ययन से पता चलता है कि वर्तमान मानव (Homo Sapiens) लगभग 2 लाख वर्ष पू...