बुधवार, 20 अक्टूबर 2021

तीन हत्या, तीन बलियां के बकरे और एक षड्यंत्रकारी

 तीन हत्या, तीन बलियां और एक षड्यंत्रकारी

वीरता, शौर्य, पराक्रम और साहस के नायकों में आप किसको शामिल करना चाहेंगे? जो किसी युद्ध या लोकहित के संघर्ष में आगे बढ़कर अपने प्राणों की आहुति देने को सदैव तत्पर रहते हैं या खुद को पीछे रखकर दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर पर्दे की ओट में कायर, डरपोक और नपुंसक की तरह छिप जायें? अपने और दूसरों के जीवन का मोल और महत्व के पैमाने अलग-अलग मानने वाले को आप क्या कहेंगे—सज्जन, सीधा, सरल, ईमानदार या फिर धूर्त, षड्यंत्रकारी, बेइमान, हत्यारा?

चलिए बात शुरू करते हैं इंग्लैंड से। जहां लंदन के इंडिया हाउस में भारत की आज़ादी के चाहने वाले अक्सर इकट्ठा होकर आपस में चर्चा करते। यहीं पर विनायक दामोदर सावरकर ने एक गुप्त संगठन अभिनव भारत बनाया। इसके एक सदस्य तीन हत्या, तीन बलि के बकरे और एक षड्यंत्रकारी

वीरता, शौर्य, पराक्रम और साहस के नायकों में आप किसको शामिल करना चाहेंगे? जो किसी युद्ध या लोकहित के संघर्ष में आगे बढ़कर अपने प्राणों की आहुति देने को सदैव तत्पर रहते हैं या खुद को पीछे रखकर दूसरों के कंधे पर बंदूक रखकर पर्दे की ओट में कायर, डरपोक और नपुंसक की तरह छिप जायें? अपने और दूसरों के जीवन का मोल और महत्व के पैमाने अलग-अलग मानने वाले को आप क्या कहेंगे—सज्जन, सीधा, सरल, ईमानदार या फिर धूर्त, षड्यंत्रकारी, बेइमान, हत्यारा? 

(फोटो―विनायक दामोदर सावरकर, साभार―सोशल मीडिया)

चलिए बात शुरू करते हैं इंग्लैंड से। जहां लंदन के इंडिया हाउस में भारत की आज़ादी के चाहने वाले अक्सर इकट्ठा होकर आपस में चर्चा करते। यहीं पर विनायक दामोदर सावरकर ने एक गुप्त संगठन अभिनव भारत बनाया। इसके एक सदस्य मदन लाल ढींगरा भी थे।

मदनलाल ढींगरा को सावरकर ने बंगाल विभाजन के जिम्मेदार वॉयसराय लॉर्ड कर्जन को मारने का काम सौंपा। मदनलाल ने कर्जन की हत्या के तीन प्रयास किये लेकिन कभी हिम्मत न होती तो कभी जगह पर पहुंचने में देर हो जाती। इस पर प्रेरणास्रोत सावरकर ने ढींगरा को अपमानित करते हुए एक आख़िरी मौका दिया और कहा, "अबकी बार असफल हुए तो फिर कभी मुझे मुंह मत दिखाना।" 

(फोटो―मदन लाल ढींगरा, साभार―सोशल मीडिया)

लेकिन कर्जन निश्चित कार्यक्रम में भाषण देकर जा चुके थे और कर्जन का भतीजा कर्जन वाईली सामने पड़ गया। इस बार खाली हाथ न आने की कसम दी गई थी, सो ढींगरा ने भतीजे को ही गोली मारकर ढेर कर दिया। 

गुरु-चेला दोनों गिरफ्तार कर लिये गये।

मुकदमा चला, जिसमें गुरुजी साफ मुकर गए। पुलिस को उनके खिलाफ सबूत नहीं मिला तो छूट गए और शिष्य मदनलाल ढींगरा को फांसी दे दी गई।

---   ---   ---

विनायक दामोदर के बड़े भाई बाबाराव सावरकर भी अभिनव भारत के सक्रिय सदस्य थे। गुरु जी ने इस बार नासिक के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट एएमटी जैक्सन को मारने का प्लान बनाया। तो इसके लिए अनंत लक्ष्मण कान्हारे को उकसाया गया। करो या मरो के गुरुमंत्र के साथ हाथ में पिस्तौल थमा दी गयी। कन्हारे ने गुरुआज्ञा का पालन करते हुए 29 दिसंबर, 1909 कलैक्टर को मार गिराया। पकड़े गए, मुकदमा झेला और अंत में फांसी चढ़ा दिये गये। 

लेकिन इस बार गुरु जी भी फँस गये। जैक्सन की हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल की खोज से पता चला कि दामोदर सावरकर ने इंग्लैंड से दस पिस्तौल तस्करी के जरिए भारत भेजी थीं। इसलिए उन्हें लंदन में स्कॉटलैंड यार्ड ने गिरफ्तार कर भारत भेज दिया। 

(फोटो―अनंत लक्ष्मण कान्हारे, साभार―सोशल मीडिया)

इस बार विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ पुख्ता सबूत पुलिस के पास थे तो मुकदमा चला और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। चूंकि इंग्लैंड से भारत लाते हुए फ्रांस के निकट जहाज से समुद्र में कूद गये थे और वहां की सरकार ने लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद ही अंग्रेजों को सौंपा था और इससे पहले लंदन में एक बलात्कार के मामले में सजायाफ्ता रहे थे और साथ ही कर्जन वाइली की हत्या में संदिग्ध रहे थे, भले ही सबूतों के अभाव में बरी कर दिये गये थे। इन सबके मद्देनजर खतरनाक अपराधी मानकर उन्हें अंडमान की सैलुलर जेल भेज दिया गया। जहां से 6 बार माफी मांगकर छूट गये लेकिन फांसी अनंत कन्हारे तो चढ़ ही गया। 

---   ---   ---

सावरकर की दूसरे को आगे कर खुद पर्दे के पीछे छिपे रहने की तीसरी कलंक-कथा सारी दुनिया जानती है। इस बार 1948 में हत्यारी पिस्तौल नाथूराम गोडसे के हाथों में थमाई गई। पकड़ा गया और लंबी-चौड़ी मुकदमेबाजी झेलने के बाद अंततः फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। सावरकर महात्मा गांधी की हत्या में शामिल होते हुए भी तकनीकी रूप से सबूतों के अभाव में  छोड़ दिया गया।

ये तो जगजाहिर हत्याकांड हैं, जिनमें हत्या के लिए उकसाने वाला गुरु साफ बच निकला और चेला बलि का बकरा बनाकर यमपुरी भेज दिया गया।

(फोटो―नाथूराम गोडसे, साभार―सोशल मीडिया)

इनके अलावा एक और ऐसे ही बलि का बकरा बनते-बनते रह गये थे चंद्र शेखर आजाद। उन्हें इन्हीं षड्यंत्रकारी गुरुजी ने मुहम्मद अली जिन्ना को मार डालने के लिए पिस्तौल और पचास हजार रुपये देने की पेशकश की लेकिन आजाद भड़क उठे और कहा, "सावरकर हमें भाड़े का हत्यारा समझता है?" 

इन चारों घटनाओं से क्या नतीजा निकलता है? यही न कि विनायक दामोदर सावरकर वीरता, शौर्य, पराक्रम और साहस की कसौटी पर खरे उतरे नायक नहीं बल्कि धूर्त, षड्यंत्रकारी, बेइमान और दूसरों के जीवन से खिलवाड़ करने वाला हत्यारा था।

---   ---   ---

आज आप देखिए कि सावरकर के चेले उसकी षड्यंत्रकारी नीति का अनुसरण करते हुए खुद तो राष्ट्रवाद और हिंदू-हित की बातें कर लोगों को गुमराह करते हुए देश पर राज कर रहे हैं, अपने बच्चों को विदेशों में भेजकर उच्च स्तरीय शिक्षा दिलवा रहे हैं और आपके बच्चों की शिक्षा महंगी कर, उनके रोजगार छीनकर, उन्हें नशेड़ी बनाकर और उनको हत्या के औजार पकड़ाकर उन्हें हिंसा के लिए उकसा रहे हैं। ये उन्हें मदनलाल ढींगरा, अनंत कन्हारे या नाथूराम गोडसे बना रहे हैं।

सोचिए कि क्या कार सेवा, साम्प्रदायिक दंगे या किसी सामाजिक आंदोलन या सीमा पर किसी मंत्री, बड़े राजनेता, उद्योगपति का बेटा या परिजन की मृत्यु हुई है? ऐसी जगहों पर मौत को गले लगाने वाले कौन थे या हैं?

सोचिए, हो सके तो और भी गहराई से अध्ययन, मनन, चिंतन कीजिए और इन धूर्तों के चंगुल में फंसने से बचिये-बचाइये।  भी थे।

मदनलाल ढींगरा को सावरकर ने बंगाल विभाजन के जिम्मेदार वॉयसराय लॉर्ड कर्जन को मारने का काम सौंपा। मदनलाल ने कर्जन की हत्या के तीन प्रयास किये लेकिन कभी हिम्मत न होती तो कभी जगह पर पहुंचने में देर हो जाती। इस पर प्रेरणास्रोत सावरकर ने ढींगरा को अपमानित करते हुए एक आख़िरी मौका दिया और कहा, "अबकी बार असफल हुए तो फिर कभी मुझे मुंह मत दिखाना।" 

लेकिन कर्जन निश्चित कार्यक्रम में भाषण देकर जा चुके थे और कर्जन का भतीजा कर्जन वाईली सामने पड़ गया। इस बार खाली हाथ न आने की कसम दी गई थी, सो ढींगरा ने भतीजे को ही गोली मारकर ढेर कर दिया। 

गुरु-चेला दोनों गिरफ्तार कर लिये गये।

मुकदमा चला, जिसमें गुरुजी साफ मुकर गए। पुलिस को उनके खिलाफ सबूत नहीं मिला तो छूट गए और शिष्य मदनलाल ढींगरा को फांसी दे दी गई।

---   ---   ---

विनायक दामोदर के बड़े भाई बाबाराव सावरकर भी अभिनव भारत के सक्रिय सदस्य थे। गुरु जी ने इस बार नासिक के डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट एएमटी जैक्सन को मारने का प्लान बनाया। तो इसके लिए अनंत कन्हारे को उकसाया गया। करो या मरो के गुरुमंत्र के साथ हाथ में पिस्तौल थमा दी गयी। कन्हारे ने गुरुआज्ञा का पालन करते हुए 29 दिसंबर, 1909 कलैक्टर को मार गिराया। पकड़े गए, मुकदमा झेला और अंत में फांसी चढ़ा दिये गये। 

लेकिन इस बार गुरु जी भी फँस गये। जैक्सन की हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल की खोज से पता चला कि दामोदर सावरकर ने इंग्लैंड से दस पिस्तौल तस्करी के जरिए भारत भेजी थीं। इसलिए उन्हें लंदन में स्कॉटलैंड यार्ड ने गिरफ्तार कर भारत भेज दिया। 

इस बार विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ पुख्ता सबूत पुलिस के पास थे तो मुकदमा चला और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। चूंकि इंग्लैंड से भारत लाते हुए फ्रांस के निकट जहाज से समुद्र में कूद गये थे और वहां की सरकार ने लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद ही अंग्रेजों को सौंपा था और इससे पहले लंदन में एक बलात्कार के मामले में सजायाफ्ता रहे थे और साथ ही कर्जन वाइली की हत्या में संदिग्ध रहे थे, भले ही सबूतों के अभाव में बरी कर दिये गये थे। इन सबके मद्देनजर खतरनाक अपराधी मानकर उन्हें अंडमान की सैलुलर जेल भेज दिया गया। जहां से 6 बार माफी मांगकर छूट गये लेकिन फांसी अनंत कन्हारे तो चढ़ ही गया। 

---   ---   ---

सावरकर की दूसरे को आगे कर खुद पर्दे के पीछे छिपे रहने की तीसरी कलंक-कथा सारी दुनिया जानती है। इस बार 1948 में हत्यारी पिस्तौल नाथूराम गोडसे के हाथों में थमाई गई। पकड़ा गया और लंबी-चौड़ी मुकदमेबाजी झेलने के बाद अंततः फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। सावरकर महात्मा गांधी की हत्या में शामिल होते हुए भी तकनीकी रूप से सबूतों के अभाव में  छोड़ दिया गया।

ये तो जगजाहिर हत्याकांड हैं, जिनमें हत्या के लिए उकसाने वाला गुरु साफ बच निकला और चेला बलि का बकरा बनाकर यमपुरी भेज दिया गया।

इनके अलावा एक और ऐसे ही बलि का बकरा बनते-बनते रह गये थे चंद्र शेखर आजाद। उन्हें इन्हीं षड्यंत्रकारी गुरुजी ने मुहम्मद अली जिन्ना को मार डालने के लिए पिस्तौल और पचास हजार रुपये देने की पेशकश की लेकिन आजाद भड़क उठे और कहा, "सावरकर हमें भाड़े का हत्यारा समझता है?" 

इन चारों घटनाओं से क्या नतीजा निकलता है? यही न कि विनायक दामोदर सावरकर वीरता, शौर्य, पराक्रम और साहस की कसौटी पर खरे उतरे नायक नहीं बल्कि धूर्त, षड्यंत्रकारी, बेइमान और दूसरों के जीवन से खिलवाड़ करने वाला हत्यारा था।

---   ---   ---

आज आप देखिए कि सावरकर के चेले उसकी षड्यंत्रकारी नीति का अनुसरण करते हुए खुद तो राष्ट्रवाद और हिंदू-हित की बातें कर लोगों को गुमराह करते हुए देश पर राज कर रहे हैं, अपने बच्चों को विदेशों में भेजकर उच्च स्तरीय शिक्षा दिलवा रहे हैं और आपके बच्चों की शिक्षा महंगी कर, उनके रोजगार छीनकर, उन्हें नशेड़ी बनाकर और उनको हत्या के औजार पकड़ाकर उन्हें हिंसा के लिए उकसा रहे हैं। ये उन्हें मदनलाल ढींगरा, अनंत कन्हारे या नाथूराम गोडसे बना रहे हैं।

सोचिए कि क्या कार सेवा, साम्प्रदायिक दंगे या किसी सामाजिक आंदोलन या सीमा पर किसी मंत्री, बड़े राजनेता, उद्योगपति का बेटा या परिजन की मृत्यु हुई है? ऐसी जगहों पर मौत को गले लगाने वाले कौन थे या हैं? 

सोचिए, हो सके तो और भी गहराई से अध्ययन, मनन, चिंतन कीजिए और इन धूर्तों के चंगुल में फंसने से बचिये-बचाइये। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

मनुष्य की यात्रा और वर्तमान पड़ाव

मनुष्य की यात्रा और वर्तमान पड़ाव  वैज्ञानिकों द्वारा किये गये जीनोम-अध्ययन से पता चलता है कि वर्तमान मानव (Homo Sapiens) लगभग 2 लाख वर्ष पू...