शनिवार, 16 अप्रैल 2022

मुंगेरीलाल का हसीन सपना है अखंड भारत

 मुंगेरीलाल का हसीन सपना है अखंड भारत


रासस प्रमुख मोहन भागवत ने कनखल (हरिद्वार) में एक समारोह को सम्बोधित करते हुए दक्षिणपंथियों का पुराना राग फिर से आलापते हुए कहा है कि '15 साल में भारत फिर 'अखंड भारत' बन जाएगा। यह सब हम अपनी आंखों से देखेंगे। अगर हम सब मिलकर थोड़ा प्रयास करेंगे और इसकी गति बढ़ाएंगे तो स्वामी विवेकानंद और महर्षि अरविंद के सपनों का अखंड भारत बन जाएगा।'
आश्चर्यजनक यह है कि वे यहीं नहीं रुके बल्कि उन्होंने दावा किया कि 'इसे कोई रोकने वाला नहीं है, जो इसके रास्ते में जो आएंगे, मिट जाएंगे।'
अपने इरादे को परिणति तक पहुंचाने के लिए कोई किम जोंग उन जैसा सिरफिरा तानाशाह ही मोहन भागवत जैसी भाषा का प्रयोग कर सकता है, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक समझ रखने वाला जिम्मेदार व्यक्ति नहीं क्योंकि अखंड भारत की इनकी परिकल्पना देश की हिमालय और समुद्री सीमा रेखाओं से परे अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, थाइलैंड और तिब्बत तक जाती है।
अब कोई मोहन भागवत से पूछे कि ऐसा कैसे सम्भव होगा? जब प्रधानमंत्री के पद पर आपके एक प्रचारक स्वयंसेवक के आसीन होते हुए चीन ने अरुणाचल प्रदेश में वास्तविक भारतीय सीमा के करीब 4.5 किमी. अंदर ऊपरी सुबनसिरी जिले में करीब सौ घरों वाला एक गांव बसा लिया। अरुणाचल प्रदेश में चीन की घुसपैठ पर वहां से भाजपा सांसद तापिर गावो की लोकसभा में दी गई चेतावनी को भी अनसुना कर दिया गया। पश्चिम में लद्दाख में चीन ने भारतीय सीमा के अंदर जबरन घुसकर गलवान घाटी में स्पैनगुर त्सो (पैंगोंग झील) के इलाके में नई सड़क का निर्माण कर लिया। जबकि पैंगोंग त्सो के दक्षिणी किनारे की ऊंची पहाड़ियों पर, फिंगर 4 के पूर्व में, उसने पहले ही कब्जा कर लिया। और, वह चीन के आगे थर-थर कांपते हुए कहता है, "न कोई घुसा था और न ही किसी ने कब्जा किया हुआ है!"
दूसरी बात, क्या अखंड भारत के संघी विचार से भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, म्यांमार, थाइलैंड, श्रीलंका और चीन (तिब्बत) सहमत हैं? जिनकी मंजूरी के बिना तो यह एक दिवास्वप्न से अधिक नहीं है। या फिर आपके आदेश देते ही ये सभी देश पूरा इलाका छोड़ कर आपको सोने की थाली में सजाकर सौंप देंगे? यदि ऐसा नहीं है तो फिर ऐसी बेवकूफी भरी बात किसे मूर्ख बनाने के लिए कही गई है? सभी तो आपके संगठन के लठैत नहीं होते कि उनके सामने कुछ भी कह दिया जाये और वे समर्थन में जै-जैकार करने लग जायें मिस्टर भागवत।
अब रासस की उस पीड़ा को भी देख लिया जाये जो इसे भारत में मुसलमानों को लेकर है। मुस्लिम आबादी के नजरिये से भी देखें तो इनकी आबादी अफगानिस्तान (3.42 करोड़), पाकिस्तान (20.04 करोड़), बांग्लादेश (15.3 करोड़), म्यांमार (19.18 लाख), थाइलैंड (38.02 लाख) और भारत (22.5 करोड़) यानी प्रस्तावित अखंड भारत में कुल मुस्लिम आबादी 61.83 करोड़ हो जायेगी। जबकि भारत में हिंदुओं की संख्या 96 करोड़ 63 लाख है। रासस और उसकी तरह अपनी समस्याओं का कारण मुसलमानों को मानने वाले अन्य संगठनों को जब देश के वर्तमान 22.5 करोड़ मुस्लिमों से तकलीफ होती है, तो फिर अखंड भारत बनने से यह पीड़ा कम होने की जगह बढ़ ही जायेगी; क्योंकि तब कुल मिलाकर 61.83 करोड़ मुसलमान एकसाथ अखंड भारत में होंगे। जब अभी 22.5 करोड़ मुस्लिमों के कारण भारत के इस्लामिक राष्ट्र बन जाने का खतरा बताया जा रहा है, तब तो स्थिति आज से भी ज्यादा विस्फोटक हो जायेगी।
संघ प्रमुख द्वारा ऐसी बात कहने से पहले संविधान से अनुच्छेद 370 हटाने और 35ए को समाप्त करने पर संसद में चर्चा के दौरान गृहमंत्री अमित शाह ने भी पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) को भारत में शामिल करने का भरोसा दिया था।
माना कि अखंड भारत की चर्चा स्वामी विवेकानंद (12 जनवरी, 1863-4 जुलाइ, 1902) और महर्षि अरविंद (15 अगस्त, 1872- 5 दिसंबर, 1950) ने भी की थी लेकिन वह दौर अंग्रेजी शासन का था। जो तत्कालीन अंतरराष्ट्रीय राजनीति, आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक स्तर पर न तब सम्भव हो सका और न निकट भविष्य में ऐसी कोई उम्मीद है। तो फिर इन लोगों की बात को मुंगेरीलाल का हसीन सपना ही माना जाएगा। या फिर सत्ता के नशे का दुष्प्रभाव जो अच्छे-अच्छे का दिमाग फेर देता है। शायद तुलसीदास ने ठीक ही कहा था―
छुद्र नदीं भरि चलीं तोराई।
जस थोरेहुं धन खल इतराई।।
(रामचरितमानस—4.14.3) ■


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