अब मैं मौत बन गया हूं, दुनिया का विनाशक
―जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर
आज 22 अप्रैल है, परमाणु बम के जनक जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर का जन्मदिन। वे 1904 में आज ही के दिन अमेरिका में जन्मे थे। ओपेनहाइमर सितंबर 1911 में स्कूल में दाखिल हुए। उनकी अध्ययन तथा स्मरण शक्ति इतनी प्रबल थी कि वे सिर्फ 10 साल की उम्र में ही भौतिकी, खनिज और रसायन शास्त्र का अध्ययन कर रहे थे। इसी बीच न्यूयॉर्क मिनरलॉजिकल क्लब के साथ उनका पत्राचार विद्वतापूर्ण और इतना उच्च स्तरीय था कि उन्हें सिर्फ बारह वर्ष की अल्पावस्था में एक व्याख्यान देने के लिए आमंत्रित किया गया।
रॉबर्ट ने पढ़ाई-लिखाई में बहुत जल्दी प्रगति की और 192
ओपेनहाइमर कण भौतिकी, खगोल भौतिकी और क्वांटम यांत्रिकी सहित भौतिक विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों की एक विस्तृत श्रृंखला पर काम करते थे। कहा जाता है कि उनके पास लंबे समय तक भौतिकी के एक ही क्षेत्र में काम करने के लिए बहुत अधिक धैर्य नहीं था। जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले में एक अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी और भौतिकी के प्रोफेसर थे लेकिन वे परमाणु बम के जनक के रूप में अधिक विख्यात हैं।
2 अगस्त, 1939 में अल्बर्ट आइंस्टीन ने राष्ट्रपति फ्रेंकलिन डी. रूजवेल्ट को एक पत्र लिखा था जो रूजवेल्ट को दो माह बाद 11 अक्टूबर को मिला। पत्र में संभावना व्यक्त की गई थी कि जर्मनी अपने परमाणु हथियार विकसित कर सकता है। इससे रूजवेल्ट को परमाणु हथियार विकसित करने के लिए एक अमेरिकी कार्यक्रम शुरू करने की प्रेरणा मिली। इस परियोजना में अमेरिका, इंग्लैंड और कनाडा शामिल थे। परियोजना को 'मैनहट्टन प्रोजेक्ट' नाम दिया गया। ओपेनहाइमर को 1942 में इस प्रोजेक्ट की गुप्त हथियार प्रयोगशाला का प्रमुख वैज्ञानिक निदेशक बनाया गया। दुनिया का पहला परमाणु बम बनाने की इस परियोजना का अनुसंधान और विकास वाला हिस्सा लॉस एलामोस में था।
जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर ने लॉस एलामोस में काम करने के लिए दुनिया के कुछ अच्छे वैज्ञानिकों की भर्ती की, जिनमें रिचर्ड फेनमैन और एनरिको फर्मी भी शामिल थे। वहां के वैज्ञानिकों और इंजीनियरों ने पहले परमाणु परीक्षण विस्फोट का नेतृत्व किया, जिसे 'ट्रिनिटी' नाम दिया गया था। इनकी टीम ने जर्मनी के आत्मसमर्पण के बाद न्यू मैक्सिको में 16 जुलाइ, 1945 को पहला परमाणु परीक्षण 'ट्रिनिटी टेस्ट' किया। इसे देखते हुए ओपेनहाइमर ने बाद में एक टिप्पणी में भगवद्गीता का यह श्लोक उद्धृत करते हुए कहा कि 'अब मैं मौत बन गया हूं, दुनिया का विनाशक'―
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता।
यदि भाः सदृशी सा स्याद् भासस्तस्य महात्मनः॥11/12॥
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो
लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः।...
ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे
येऽवस्थिताः प्रत्यनिकेषु ययोधाः॥11/32॥
दिवि सूर्यसहस्रस्य भवेद्युगपदुत्थिता।
यदि भाः सदृशी सा स्याद् भासस्तस्य महात्मनः॥11/12॥
कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो
लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्तः।...
ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे
येऽवस्थिताः प्रत्यनिकेषु ययोधाः॥11/32॥
द्वितीय विश्वयुद्ध की चरमावस्था में 6 अगस्त, 1945 को जापान के हिरोशिमा पर ‘लिटिल ब्वॉय’ और तीन दिन बाद 9 अगस्त, 1945 को नागासाकी पर ‘फैट मैन’ नामक परमाणु बम गिराये जाने के साथ ही इस परियोजना का अंत हो गया। उसी वर्ष अक्टूबर में ओपेनहाइमर ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। युद्ध की समाप्ति पर राष्ट्रपति ट्रूमैन ने 1946 में लॉस एलामोस टीम के निदेशक के रूप में ओपेनहाइमर की भूमिका के लिए उनको 'मेडल ऑफ मेरिट' से सम्मानित किया और उन्हें नव-निर्मित युनाइटेड स्टेट्स एटॉमिक इनर्जी कमीशन का मुख्य सलाहकार बनाया। उन्होंने अपनी उस हैसियत का उपयोग परमाणु अप्रसार, सोवियत संघ के साथ परमाणु हथियारों की दौड़ रोकने तथा परमाणु ऊर्जा के अंतरराष्ट्रीय नियंत्रण के लिए किया। यहां अध्यक्ष के रूप में उन्होंने 1947 से 1952 तक सेवा दी और इसी बीच अक्टूबर 1949 में हाइड्रोजन बम के विकास का विरोध किया।
ओपेनहाइमर ने भौतिकी में व्याख्यान और लेखन का काम जारी रखा। उन्हें राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी ने 1963 में सम्मानित किया।
अधिक धूम्रपान के कारण गले के कैंसर से ओपेनहेमर की 18 फरवरी, 1967 को 62 वर्ष की उम्र में मृत्यु हो गई।

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