मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

प्राचीन साहित्य में जल-प्रलय

प्राचीन साहित्य में जल-प्रलय की घटना


कुछ समय पहले माया सभ्यता के कलेंडर पर आधारित हॉलीवुड फिल्म―2012 देखी थी। जल-प्रलय अथवा हिमयुग के अकस्मात् आगमन की परिकल्पना पर आधारित यह फिल्म बेहद रोचक बन पड़ी है। तब से मैं लगातार यह सोच रहा हूँ कि जल-प्लावन (प्रलय) की घटना कपोल-कल्पित है अथवा एक सच्चाई? आइये देखते हैं कि हमारे पूर्वजों ने इस बारे में क्या कहा-लिखा है―

जल-प्लावन की घटना संसार के लगभग सभी मत-सम्प्रदायों से सम्बंधित प्राचीन ग्रंथों में भिन्न-भिन्न रूपों में वर्णित है। प्राचीन भारतीय वांग्मय में इसका विशद वर्णन मिलता है।

विश्व के सर्वाधिक पुरातन साहित्य ऋग्वेद (8-27-30) में यह प्रलय-वृत्त विस्तारपूर्वक वर्णित है। इसके अतिरिक्त अथर्ववेद (19-39-8), महाभारत (वनपर्व-अ-197, आरण्यकपर्व-185-4), मत्स्य पुराण (2-16-19) और श्रीमद्भागवत में भी यह कथा वर्णित है। ईसा से लगभग 2500 वर्ष पूर्व रचित शतपथ-ब्राह्मण (1-8-6 ) के अनुसार भगवान की आज्ञानुसार सप्तम मनु (वैवस्वत मनु) ने जल-प्रलय से पहले एक वृहदाकार नाव बना कर उसमें सभी तरह के जीव-जंतुओं के जोड़े तथा समस्त प्रकार की वनस्पतियों को एकत्र किया। एक कल्प भर उस अपरिमित जलराशि में परिभ्रमण करते रहने के बाद उससे मुक्ति पाने के लिए उन्होंने अपनी विशालकाय नाव हिमवान पर्वत के उत्तर गिरि-प्रदेश में मनोरवसर्पण स्थान पर बाँध दी। धीरे-धीरे जल के नीचे उतरने के साथ ही वह भी उतरते चले गये। जैसे-जैसे पानी नीचे उतरते गया, जीव-जंतुओँ की वंश-वृद्धि भी होती गयी। कुछ तो पहले ही जल में निवास कर रहे थे और कुछ बाद में ज़मीन पर विकसित हुए। इस प्रकार फिर से जीव-जंतुओं से भरी हुई एक नयी सृष्टि का अभ्युदय हुआ।

बाइबिल में इसका कारण समुद्री बाढ़ बताई गयी है तो जेंदअवेस्ता में अत्यधिक हिमपात। जल-प्रलय की घटना का उल्लेख कुरान में भी पाया जाता है। यूनान, बेबीलोन तथा मिश्र के प्राचीन कथा-साहित्य में कुछ मामूली अंतर के साथ जल-प्रलय की यह कथा मिलती है। चाल्डिया के डेल्यूस टेबलेट में भी यह प्रलय-कथा वर्णित है।

यूनान के प्राचीन इतिहास में वर्णित है कि जब लिंकाओन के पचास राक्षस पुत्रों के कुकर्मों के पाप से यह धरती भर गयी तो ज़िअस ने क्रोध में भर कर जल-प्रलय उत्पन्न कर दिया। नौ दिन और नौ रात तक लगातार भयंकर मूसलाधार वर्षा होती रही। अंत में डूबने से बचे हुए लोगों ने ऊंचे-ऊंचे पर्वतों पर जाकर अपनी प्राण-रक्षा की। ड्युकालियन को उसके पिता ने जल-प्लावन की घटना से पहले ही सावधान कर दिया था, इसलिए उसने एक बड़ी-सी नाव में बैठ कर नौ दिन-नौ रात किसी तरह काट कर परनस पर्वत-शिखर पर आश्रय लिया।

पारसियों के पवित्र ग्रंथ जेंदअवेस्ता के अनुसार प्रलय के दिन अहुरमज्द ने कहा―''हे विघनघत के पुत्र यिम (विवस्वान के पुत्र यम), इस संसार में अब भयानक शीत पड़ने वाला है। अत्यधिक हिमपात के कारण समस्त पर्वत, वन, निचले स्थानों पर निवास करने वाले जीव-जंतु आदि सब नष्ट हो जायेंगे। अतः तुम जाकर एक बड़ा-सा बाड़ा बनाओ, उसमें मनुष्य, पशु, पक्षी, जीव-जंतुओँ के जोड़े तथा सभी प्रकार की वनस्पतियों के बीज एकत्र करो।"

इसी तरह बाइबिल (अध्याय―6,7,8,9) में भी लिखा है कि परमेश्वर के आदेशानुसार नूह (मनु) ने एक बड़ी नाव में अपने परिवार के सात सदस्यों (सप्तर्षियों) और सभी जीव-जंतुओं का एक-एक जोड़ा तथा समस्त वनस्पतियों के बीज रखे। चालीस दिन और चालीस रात निरंतर भयानक वर्षा होने के बाद किश्ती अरारात पर्वत-शिखर पर ठहर गयी।

कुरान में भी जल-प्रलय की घटना का वर्णन मिलता है। कुरान (सूरा―11 आयत―37-48) में कहा गया है―"तू उन दुर्जनों के कर्तव्य पर चिंता न कर, और हमारे आदेश के अनुसार हमारे निरीक्षण में एक नौका बना। उनका तनिक पक्ष न लेना जो दुर्जन हैं क्योंकि वे अवश्य जलमग्न किये जाएँगे। और, वह नौका बनाने लगा, यहाँ तक कि हमारा आदेश आ पहुँचा और ‘तनूर’ से जल उबलने लगा तो हमने आदेश किया कि इस नौका में प्रत्येक प्रजाति के जानवरों के नर-मादा जोड़े सवार कर और उन्हें भी सवार कर जो ईमान लाये। फिर पहाड़-जैसी मौजों के बीच वह नौका तैरने लगी। फिर आदेश दिया गया कि हे पृथ्वी! अपना जल पी जा और हे आकाश थम जा! जल तुरंत घट गया और काम तमाम कर दिया। नौका जूदी पर्वत पर जा टिकी। फिर आदेश हुआ कि हे नूह कुशलतापूर्वक उतर!"

भारतीय वांग्मय में वर्णित स्वयंभुव मनु के समय से पूर्व समस्त हिमालयी क्षेत्र अथाह समुद्री जलराशि के गर्भ में था। आधुनिक भूगर्भशास्त्रियों के अनुसार आज का सर्वोच्च पर्वत हिमालय कभी टीथियस नामक महासागर के गर्भ में था। प्रथम मनु स्वम्भुव के बाद छः बार हुए जल-प्रलय में सृष्टि का व्यापक विनाश हुआ। प्रलय-कथा कहने के लिए कुछ ही लोग जीवित रह पाये। तदनंतर एक बार फिर नए युग का श्रीगणेश हुआ।

क्या एक बार फिर इतिहास अपने को दुहरायेगा?


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